अपनापन
अपनों में खोजना
रेत में सुई
-निवेदिताश्री
अपने रूठे
जग वालों के साथ
नाते यूँ टूटे !
-आनंद सिंघनपुरी
अपने जाये
अपनों के हो गये
बुढ़ापा रोये
-भगवत भट्ट
अपने घोड़े
बेलगाम हो गये
कैसी लाचारी !
-सावित्री डागा
अपनापन
ढूँढ़ मत दोस्तों में
टूट जाएगा !
-डा. सुरेन्द्र सिंघल
अपनापन
गल रहा मोम–सा
आकुल मन
-द्विजेन्द्र शर्मा
अकेली जान
अपनापन लिए
ढलती साँझ
-आरती पारीख
अपनापन
ढूँढ़ मत दोस्तों में
टूट जाएगा!
-डा. सुरेन्द्र सिंघल
अपनापन
गल रहा मोम–सा
आकुल मन
-द्विजेन्द्र शर्मा
अपनापन
अपनों में खोजना
रेत में सुई
-निवेदिताश्री
अकेली जान
अपनापन लिए
ढलती साँझ
-आरती पारीख
(हाइकु कोश)