अपने ‘पर’
तौलते रहे पक्षी
दरख़्तों पर
-बृजेश त्रिपाठी
अटकी साँस
कागज की किताब
पेड़ खा गयी
-दिनेश चन्द्र पाण्डेय
आँधी से खफा
नहा कर वर्षा में
सो गया वृक्ष
–डॉ. नरेन्द्र कल्ला
आँधियाँ चलीं
बिछुड़ते पेड़ से
काँपते पत्ते
–रेखा जोशी
अहं की गर्मी
रिश्तों का वटवृक्ष
ठूँठ हो गया
-वीरेश अरोड़ा‘वीर’ग
अल्हड़ हवा
उदास पेड़ों को छू
खिलखिलाए
-आरती मिश्रा
अमर बेल
विटप पर सोहे
विप्र–जनेऊ
-आदित्यप्रताप सिंह
अटकी साँस
कागज की किताब
पेड़ खा गयी
-दिनेश चन्द्र पाण्डेय
(हाइकु कोश)
अंतिम पत्ता
गिरा दिया वृक्ष ने
शांत भाव से
-शैल सक्सेना
(हाइकु कोश)