आते ही आते
तानाशाह सूर्य ने
दीये बुझाये
-कमलेश भट्ट कमल
अकेले नहीं
सूरज भी चलता
तुम्हारे साथ
-शिवमोहन सिंह ‘शुभ्र’
अकेली साँझ
न चंदा न सूरज
बस गौ–रज
-रेखा रोहतगी
आँखें मलता
कुहरे की शॉल में
सूर्य निकला
-डॉ. पूनम
अरुणोदय
अँधेरी रात पर
ज्योति–विजय
-डॉ. मधुसूदन साहा
अकेले नहीं
सूरज भी चलता
तुम्हारे साथ
-शिवमोहन सिंह ‘शुभ्र’
(हाइकु कोश)
अकेली साँझ
न चंदा न सूरज
बस गौ-रज
-रेखा रोहतगी
(हाइकु कोश)
अंत जरूरी
नये आरंभ हेतु
डूबता सूर्य
-विद्या चौहान
(हाइकु कोश)