आते ही आते
तानाशाह सूर्य ने
दीये बुझाये
-कमलेश भट्ट कमल
आखिरी युद्ध
लड़ना अकेले ही
मौत के साथ
–कमलेश भट्ट कमल
आओ रे ग्रीष्म!
तैयार हैं हम भी
बोलीं कोंपलें
–कमलेश भट्ट कमल
आँकड़ों भरी
देश की किताब में
जिंस आदमी
-कमलेश भट्ट कमल
अंकुर नहीं
जीवन ही जीवन
बीजों से फूटे
-कमलेश भट्ट कमल
(हाइकु कोश)