अपनी व्यथा
चीखकर बताता
समुद्र हमें
-ममता किरण
अठखेलियाँ
मिली ज्यों सहेलियाँ
सिन्धु–लहरें
-सुदर्शन रत्नाकर
लगा के गले
शातिर समंदर
नदी को छले
-अभिषेक जैन
अमृत बाँट
चाँद रहा खामोश
सिंधु उछला
-पुष्पा मेहरा
अपार सिंधु
अनिमेष निहारे
नवेली निशा
-स्वाति भालोटिया
अपनी व्यथा
चीखकर बताता
समुद्र हमें
-ममता किरण
अठखेलियाँ
मिली ज्यों सहेलियाँ
सिन्धु-लहरें
-सुदर्शन रत्नाकर
(हाइकु कोश)
अपार सिंधु
अनिमेष निहारे
नवेली निशा
-स्वाति भालोटिया
(हाइकु कोश)