अधिक बातें
बेमतलब हँसी
उलझे रिश्ते
–मानोशी चटर्जी
अजब हैं ये
दुनियावी रिश्ते भी
मौसम–जैसे
-डॉ. आरती स्मित
आँखों की नमी
बंजर न होने दे
रिश्तों की ज़मीं
-कृष्णा वर्मा
अहम बढ़े
विचार तार–तार
रिश्ते खण्डित
-डॉ. स्वर्णिमा सिन्हा
अहं की छौंक
बिगाड़ती ज़ायका
बेस्वाद रिश्ते
-आराधना झा श्रीवास्तव
अहं की गर्मी
रिश्तों का वटवृक्ष
ठूँठ हो गया
-वीरेश अरोड़ा‘वीर’ग
अपने रूठे
जग वालों के साथ
नाते यूँ टूटे!
-आनंद सिंघनपुरी
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बेमतलब हँसी
उलझे रिश्ते
-मानोशी चटर्जी
(हाइकु कोश)
अजब हैं ये
दुनियावी रिश्ते भी
मौसम-जैसे
-डॉ.आरती स्मित
(हाइकु कोश)