Showing posts with label *बादल. Show all posts
Showing posts with label *बादल. Show all posts

Thursday, February 23, 2023

आँधियाँ आयीं

आँधियाँ आयीं
टुकड़ों में बिखरा
घना बादल
–विष्णु प्रिय पाठक

Tuesday, October 18, 2022

आँखों में आशा

आँखों में आशा
निहारे काले मेघ
धान की बालें
-जीतेश वैश्य

Monday, October 17, 2022

आँखें बादल

आँखें बादल
बह गया काजल
जीवन सूना!
-रेखा राजवंशी