अगन बाण
तड़पती धरणी
दुबली नदी
-अनंत आलोक
अक्षांश भिन्न
फिर भी धरती है
हर कहीं ‘माँ’!
-धर्म जैन
अमलतास
जब बाहें फैलाए
धरा मुस्काये!
-अनिता लाल
अपार्टमेंट
नभ-धरा के बीच
टँगे हैं लोग!
-मीनू खरे
अगन बाण
तड़पती धरणी
दुबली नदी
-अनंत आलोक
(हाइकु कोश)
अक्षांश भिन्न
फिर भी धरती है
हर कहीं ‘माँ’!
-धर्म जैन
(हाइकु कोश)
अंबर तले
धरती की गोद में
सोया जगत
-उषा सोनी
(हाइकु कोश)