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Wednesday, June 21, 2023

अगन बाण

अगन बाण
तड़पती धरणी
दुबली नदी

-अनंत आलोक

अक्षांश भिन्न

अक्षांश भिन्न
फिर भी धरती है
हर कहीं ‘माँ’!

-धर्म जैन

Monday, September 26, 2022

अमलतास

अमलतास
जब बाहें फैलाए
धरा मुस्काये!

-अनिता लाल

अपार्टमेंट

अपार्टमेंट 
नभ-धरा के बीच 
टँगे हैं लोग!
-मीनू खरे 

Thursday, August 11, 2022

अगन बाण

अगन बाण
तड़पती धरणी
दुबली नदी
-अनंत आलोक
(हाइकु कोश)

अक्षांश भिन्न

अक्षांश भिन्न
फिर भी धरती है
हर कहीं ‘माँ’!
-धर्म जैन
(हाइकु कोश)

Wednesday, August 10, 2022

अंबर तले

अंबर तले
धरती की गोद में
सोया जगत
-उषा सोनी
(हाइकु कोश)